इतिहास:
Jammu & Kashmir
शहर की उत्पत्ति: एक लोकप्रिय पौराणिक कथा के अनुसार राजा जम्बूलोचन ने १४ वीं सदी ईसा पूर्व में “मंदिरों के शहर” की स्थापना की। यह माना जाता है कि एक दिन शिकार के दौरान जब वह तवी नदी के किनारे पहुँचें, और वहाँ एक ही जगह पर एक बकरी और एक शेर को पानी पीते देख हैरान हो गए और इस निष्कर्ष पर पहुँचें कि ऐसी जगह जहाँ एक शेर और बकरी साथ साथ जीवित रह सकते हैं, निश्चित रूप से शांति और सद्भाव का देश है। इस घटना को याद करते हुए उन्होंने इस जगह पर एक महल का निर्माण करवाने का निर्णय लिया और जम्बू-नगर नामक शहर की स्थापना की, जो समय के साथ जम्मू के रूप में लोकप्रिय हो गया।
 

प्राचीन इतिहास: सुंदर जम्मू शहर की महिमा का भी महान भारतीय महाकव्य महाभारत में उल्लेख किया है। पुरातात्विक साक्ष्यों का कथन है कि जम्मू हड़्प्पा सभ्यता की जमीन थी। इसके अलावा जम्मू शहर एक लंबा शाही वंश का दावा करता है। मौर्य, गुप्त तथा कुषाण से शाही, मुगल और सिख, जम्मू कई महान शाही राजवंशों का घर रह चुका है। महान सिख शासक महाराजा रणजीत सिंह की मृत्यु के बाद, ब्रिटिशों ने जम्मू का पदभार संभाल लिया और महाराजा गुलाब सिंह को यहाँ के शासक के रूप में नियुक्त किया। महाराजा गुलाब सिंह के सिहांसन के चढ़ाव के साथ प्रसिद्ध डोगरा राजवंश वर्चस्व में आया। गुलाब सिंह के शासनकाल के दौरान ही जम्मू-कश्मीर एकीकृत किया गया। इस प्रकार वह जम्मू-कश्मीर के संस्थापक के रूप में जाने जाते हैं।