नामांतरण एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके द्वारा चावनी क्षेत्र में स्थित किसी भी संपत्ति/भूमि के कब्जे के अधिकार को सामान्य भूमि रजिस्टर (जी.एल.आर) में स्थानांतरित किया जाता है।
अधिसूचित सिविल क्षेत्र में नामांतरण (दाखिल-खारिज) संबंधी अभिलेख को सामान्य भूमि रजिस्टर में दर्ज करने का प्राधिकार छावनी परिषद जम्मू का है, जबकि छावनी क्षेत्र में स्थित अन्य भूमि/संपत्तियों के संबंध में रक्षा संपदा अधिकारी जम्मू का है।<
 
महत्वपूर्ण
छावनी क्षेत्र में स्थित किसी भी संपत्ति के कब्जे को सिद्ध करने के लिए सामान्य भूमि रजिस्टर (जी.एल.आर) एक अधिप्रमाणित विधिक दस्तावेज है, जिसे न्यायालय में मान्यता प्राप्त है। इस लिए यह आवश्यक है कि कोई भी व्यक्ति चाहे वह किसी भी तरीके जैसे बिक्री-नामा, उपहार, उत्तराधिकार आदि से संपत्ति हासिल कर रहा है, को हासिल की गई संपत्ति जी.एल.आर में, छावनी अधिनियम 1924 की धारा 73 में तय की गई अवधि में अपने नाम से नामांतरण (दाखिल-खारिज) करवा लेनी चाहिए। यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो भारत सरकार को यह अधिकार प्राप्त हो जाता है कि वो नियमानुसार इस संपत्ति को अपने अधिकार में ले ले। इस के अतिरिक्त पट्टा अवधि जिस में भूमि नीहित है, को केवल छावनी के जी.एल.आर में दर्ज किया जाता है। अतः छावनी क्षेत्र में स्थित अचल संपत्तियों की खरीद-फरोक्त करते समय, संबंधित संपत्ति की प्रविष्टयों की छावनी परिषद अथवा रक्षा संपदा अधिकारी, जम्मू के सामान्य भूमि रजिस्टर (जी.एल.आर) में जांच अवश्य कर लेनी चाहिए।
 
प्रक्रिया
प्रत्येक आवेदक को नामांतरण (दाखिल-खारिज) के लिए आवेदन करने से पूर्व नीहित संपत्ति की स्थिति की जांच छावनी परिषद अथवा रक्षा संपदा अधिकारी, जम्मू, जैसी भी स्थिति हो, के सामान्य भूमि रजिस्टर (जी.एल.आर) में अवश्य कर लेनी चाहिए कि वास्तव में खरीदी जाने वाली संपत्ति सामान्य भूमि रजिस्टर (जी.एल.आर) में किस नाम से दर्ज है। यदि संपत्ति/भूमि (जी.एल.आर) में दर्ज नहीं है तो हस्तांतरण करने वाले व्यक्ति को अपने नाम से दाखिल-खारिज करने से पूर्व यह कार्रवाई पूर्ण कर लेने के लिए कहा जाए । यदि खरीदी जाने वाली संपत्ति किसी भी नाम से जी.एल.आर. में दर्ज नहीं है तो ऐसी स्थिति में हस्तांरणकर्ता को ऐसी संपत्ति को अर्जित की गई संपत्ति के स्वामी (एच.ओ.आर.) को क्रमबद्ध तरीके से जी.एल.आर. में दर्ज करने का आग्रह किया जाना चाहिए । संपत्ति हस्तांतरण करवाने वाले आवेदक को संगत विधिक दस्तावेजों, जो इस कडी से जुड़े हों, जैसे कि बिक्री-नामा, उपहार-नामा, वसीयत-नामा (विल) व उत्तराधिकार आदि के प्रमाण तथा कार्रवाई के लिए कहा जाना चाहिए । उसके बाद ही आवेदक को खरीदी गई संपत्ति को अपने नाम स्थानांतरण करने हेतु निर्धारित प्रपत्र पर छावनी परिषद अथवा रक्षा संपदा अधिकारी, जम्मू को सामान्य भूमि रजिस्टर (जी.एल.आर.) में संपत्ति अपने नाम से नामांतरण करने हेतु आवेदन करना चाहिए| 
नामांतरण किए जाने हेतु आवेदन पत्र छावनी परिषद् की वैबसाईट पर उपलब्ध है अथवा रुपये 125/- की कीमत पर छावनी परिषद कार्यालय, जम्मू से प्राप्त किया जा सकता है ।.
स्थानांतरण से संबंधित सभी दस्तावेजों/अधिकार पत्रों की प्रमामित प्रतियां नामांतरण के आवेदन के साथ संलग्न की जानी आवश्यक हैं ।
उत्तराधिकार के मामले में स्थानांतर के संबंध में संपूर्ण अभिलेख जैसेकि संपत्ति धारक का नाम, हिंदू उत्तराधिकार नियम अनुसार सभी कानूनी उत्तराधिकारियों से आवेदक का संबंध, अन्य उत्तराधिकारियों से उत्तराधिकार का दावा आवेदक के पक्ष में त्यागे जाने संबंधी घोषणा, नामांतरण के आवेदन के साथ संलग्न की जानी आवश्यक है ।
उपरोक्त के संबंध में सभी दस्तावेजों/अधिकार पत्रों की मूल प्रतियां छावनी परिषद द्वारा जांच हेतु मांगे जाने पर प्रस्तुत की जानी आवश्यक हैं ।
निर्धारित प्रपत्र पर पंजिकृत स्वीकृति नामा, जिसमें भूमि पर सरकार के अधिकार की अपेक्षित मूल्य की स्टांप-पेपर, नामांतरण प्रपत्र के साथ अवश्य संलग्न किया जाना चाहिए ।
नामांतरण आवेदन पत्र के साथ रुपये 600/- का शुल्क अवश्य जमा करवाया जाए ।
उन संपत्तियों के संबंध में जहां अनाधिकृत निर्माण, अतिक्रमण, स्थलों का उप-विभाजन, उद्देश्य परिवर्तन या पट्टा अवधि की शर्तें, जिन पर संपत्ति नीहित है, में किसी तरह का उलंघन किया गया है, ऐसी स्थिति में नामांतरण भारत सरकार, रक्षा मंत्रालय की नीति एवं जारी दिशा-निर्देशों अनुसार किया जाएगा ।